राधा स्वामी जी

एक दफा रात्रि के तीसरे पहर में गुरु नानक देव जी भजन-पाठ में लीन थे !

नानक देव जी के कमरे के बाहर से नानक देव जी की माँ ने दस्तक दी और कहा -बेटे अब सो भी जाओ रात करीब-करीब जाने को हो गयी है !

नानक देव जी चुप हो गये तभी रात के अँधेरे में एक पपीहे ने जोर से आवाज दी -पीहू पीहू !नानक देव जी ने कहा -सुनो माँ अभी पपीहा भी चुप नहीं हुआ अपने प्यारे की पुकार कर रहा है तो मैं कैसे चुप हो जाऊ ?

इस पपीहे से मेरी होड़ लगी है जब तक यह गाता रहेगा-पुकारता रहेगा मैं भी पुकारता रहूँगा !इसका प्यारा तो इसके बहुत पास है ;मेरा प्यारा बहुत दूर है !

हे माँ जन्म-जन्मांतर गाता रहूँ तो ही उस तक पहुँच सकूंगा ;रात और दिन का हिसाब नहीं रखा जा सकता है !

नानक देव जी ने फिर से गाना शुरू कर दिया !

न काबिल थे ये हाथ आप की सेवा के लिए
न काबिल था ये सर आपके सजदे के लिए
न काबिल थी आवाज आपके भजनों के लिए
न काबिल थी ये स्वास आप के सिमरन के लिए

बस आप जी की पावन चरण शरण की संगती ने ना काबिल को काबिल बना दिया

गुरू प्यारी साध संगत जी और सभी सतसंगी भाई बहनों और दोस्तों को हाथ जोड़ कर प्यार भरी राधा सवामी जी…

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