राधा स्वामी जी

एक राजा को आम खाने के बेहद शौक था और शौक ही नहीं बल्कि पागलपन की हद तक शौक था | इसी कारण राजा को पाचन तंत्र की एक दुर्लभ बीमारी हो गयी | राज वेद्य ने राजा को यह कहकर आम खाने को साफ़ मना कर दिया कि आम खाना आपकी सेहत के लिए जरा भी अच्छा नही है और ये आपके लिए विष के समान है | आम राजा का शत्रु बन गया |

एक बार राजा और उसका एक मंत्री वन के भ्रमण के लिए गये तो शिकार वगेरह कर लेने के बाद जब दोनों थक कर चूर हो गये तो उन्होंने आराम करने का सोचा और दोनों एक वृक्ष के नीचे बैठ गये | मंत्री ने देखा वो आम का पेड़ था तो उसने राजा को कहा कि महाराज यंहा बैठना ठीक नहीं है हम किसी दूसरी जगह चलते है | इस पर राजा ने कहा ‘वैध्य ने आम खाने को मना किया है उसके वृक्ष की छाया में बैठने को मना नहीं किया है ” छाया में बैठने से कौनसा नुकसान होने वाला है | इसलिए मंत्री जी आप भी बैठिये इस पर मंत्री बैठ गया |

थोड़ी देर बाद राजा लालसा भरी नजरो से उपर लगे आमों को देखने लगा तो मंत्री ने राजा की इच्छा को भांपकर राजा से कहा महाराज आमों की तरफ मत देखिये तो राजा ने थोड़ी नाराजगी से कहा ” आम की छाया में मत बैठो ,आम की तरफ मत देखो यह भी कोई बात हुई निषेध तो मात्र खाने का है न ” तो मंत्री चुप हो गया |

थोड़ी देर बाद राजा नीचे गिरे हुए आम को उठाकर सूंघने लगा तो मंत्री ने फिर टोका ” अन्नदाता कृपया आम को मत छुयिये अन्यथा अनर्थ हो जायेगा चलिए उठिए कंही और चलते है ” | राजा ने कहा समझदार होकर क्या अतार्किक बाते करते हो सूंघने से आम पेट में थोड़ी चला जायेगा कहते कहते राजा आम के साथ खेलने लगा तो मंत्री को चिंता हुए तो मंत्री बोला महाराज क्या कर रहे है ?? लेकिन राजा अपनी लगन में था तो मंत्री की नहीं सुनी और बोला मैं तो केवल इसे चख भर रहा हूँ लेकिन राजा ने संयम खो दिया और लापरवाही से राजा ने आम को चूस लिया और आम को चूसते ही राजा के पेट में रसायन विकार हुआ और राजा वही ढेर हो गया |

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